पिता ही निकला हैवान! घर से भागी 13 साल की बच्ची ने रोते-रोते बताए घिनौने कांड
उत्तराखंड से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े दो गंभीर मामले सामने आए हैं, जिन्होंने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। पहले मामले में पिथौरागढ़ जिले की एक 13 वर्षीय किशोरी ने कथित तौर पर अपने पिता की अनुचित हरकतों से परेशान होकर घर छोड़ दिया। बाद में चाइल्ड हेल्पलाइन द्वारा रेस्क्यू किए जाने पर बच्ची ने काउंसलिंग के दौरान अपने पिता पर गंभीर आरोप लगाए। पुलिस ने मामले में आरोपी पिता को गिरफ्तार कर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।
वहीं दूसरे मामले में हरिद्वार जिले से एक विवाहिता और उसकी एक वर्षीय बेटी के गंगनहर में लापता होने की घटना ने नया मोड़ ले लिया है। महिला के मायके पक्ष की शिकायत पर पति सहित पांच लोगों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और अन्य आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस दोनों मामलों की अलग-अलग जांच कर रही है।
पिथौरागढ़ में 13 वर्षीय किशोरी ने छोड़ा घर
जानकारी के अनुसार, पिथौरागढ़ नगर क्षेत्र में रहने वाली एक 13 वर्षीय किशोरी जून महीने में अचानक अपने घर से लापता हो गई थी। परिवार और स्थानीय प्रशासन को सूचना मिलने के बाद चाइल्ड हेल्पलाइन और पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की।
काफी प्रयासों के बाद बच्ची को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। इसके बाद उसे सुरक्षित स्थान पर रखकर विशेषज्ञों की मौजूदगी में काउंसलिंग की गई।
काउंसलिंग में सामने आए गंभीर आरोप
काउंसलिंग के दौरान बच्ची भावुक हो गई और उसने अपने घर से भागने का कारण बताया।
पुलिस के अनुसार, किशोरी ने आरोप लगाया कि उसके पिता उसके साथ अनुचित व्यवहार करते थे, जिससे परेशान होकर उसने घर छोड़ने का फैसला किया।
बच्ची के बयान के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पिता गिरफ्तार, पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ बाल यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण कानून (POCSO Act) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया गया है।
मामले की विस्तृत जांच जारी है।
चाइल्ड हेल्पलाइन की भूमिका बनी अहम
इस मामले में चाइल्ड हेल्पलाइन की त्वरित कार्रवाई महत्वपूर्ण रही।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में बच्चों को सुरक्षित वातावरण, मनोवैज्ञानिक सहायता और कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराना बेहद जरूरी होता है।
काउंसलिंग के दौरान ही कई बार बच्चे उन घटनाओं के बारे में खुलकर बता पाते हैं, जिन्हें वे लंबे समय तक किसी से साझा नहीं कर पाते।
दूसरा मामला: हरिद्वार से मां-बेटी के लापता होने का मामला
इसी बीच हरिद्वार जिले के बहादराबाद थाना क्षेत्र से एक और चिंताजनक मामला सामने आया है।
यहां एक विवाहिता और उसकी एक वर्षीय बेटी के गंगनहर में लापता होने की घटना की जांच जारी है।
मामले में महिला के भाई की शिकायत पर पुलिस ने पति सहित पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
क्या हैं आरोप?
शिकायत के अनुसार, विवाहिता की शादी वर्ष 2020 में हुई थी।
महिला के मायके पक्ष का आरोप है कि शादी के बाद से उसे दहेज की मांग को लेकर लगातार प्रताड़ित किया जाता था।
परिजनों का यह भी आरोप है कि घटना से एक रात पहले महिला ने फोन कर बताया था कि उसके साथ मारपीट की जा रही है और उसकी तथा उसकी बेटी की जान को खतरा है।
अगले दिन मिली लापता होने की सूचना
परिजनों के अनुसार, अगले दिन महिला के पति ने फोन कर बताया कि महिला अपनी बेटी के साथ गंगनहर में कूद गई।
हालांकि महिला के मायके पक्ष ने इस दावे पर संदेह जताते हुए आरोप लगाया है कि मां-बेटी को नहर में धक्का दिया गया हो सकता है।
इन आरोपों की फिलहाल पुलिस जांच कर रही है।
पुलिस की तलाश जारी
पुलिस, जल पुलिस और अन्य बचाव दलों ने नहर क्षेत्र में खोज अभियान चलाया।
समाचार लिखे जाने तक मां और बेटी का पता नहीं चल सका था।
पुलिस का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।
हर आरोप की होगी निष्पक्ष जांच
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दोनों मामलों में जांच जारी है।
जहां पिथौरागढ़ मामले में बच्ची के बयान के आधार पर कानूनी कार्रवाई की गई है, वहीं हरिद्वार मामले में दर्ज शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है।
किसी भी आरोपी की अंतिम कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायालय में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता
बाल अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी बच्चे के साथ किसी भी प्रकार का शोषण या अनुचित व्यवहार होता है तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) या संबंधित बाल संरक्षण संस्थाओं को दी जानी चाहिए।
समय पर हस्तक्षेप कई बच्चों को गंभीर परिस्थितियों से बचा सकता है।
दहेज उत्पीड़न के मामलों में भी जरूरी है समय पर शिकायत
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी महिला के साथ दहेज, घरेलू हिंसा या उत्पीड़न जैसी घटनाएं होती हैं तो उन्हें संबंधित पुलिस थाने, महिला हेल्पलाइन या कानूनी सहायता केंद्र से संपर्क करना चाहिए।
समय पर शिकायत दर्ज होने से जांच और सहायता की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
समाज की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार, पड़ोस, स्कूल और समाज सभी की जिम्मेदारी है कि बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
यदि किसी परिवार में हिंसा, शोषण या उत्पीड़न की आशंका हो तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय संबंधित अधिकारियों तक सूचना पहुंचाना जरूरी है।
उत्तराखंड से सामने आए ये दोनों मामले महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं। पिथौरागढ़ में एक नाबालिग बच्ची के आरोपों के आधार पर पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई की है, जबकि हरिद्वार में मां-बेटी के लापता होने के मामले में पति सहित पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच जारी है। दोनों मामलों में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। ऐसे मामलों में पीड़ितों की पहचान और गरिमा की रक्षा करना तथा जांच पूरी होने तक तथ्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकालना आवश्यक है।

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